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राज्यों को अतिरिक्त कर अंतरण में 1,09,019 करोड़ रुपये मिले

केंद्र ने 31 अक्टूबर को साल की दूसरी अतिरिक्त किस्त जारी की, जिसमें उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ा और सिक्किम को सबसे छोटा हिस्सा मिला, त्योहार के मौसम से पहले।

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राज्यों को अतिरिक्त कर अंतरण में 1,09,019 करोड़ रुपये मिले

मुख्य बिंदु

  • केंद्र ने शनिवार, 31 अक्टूबर को राज्य सरकारों को कर अंतरण की अतिरिक्त किस्त के रूप में 1,09,019 करोड़ रुपये जारी किए, वित्त मंत्रालय ने कहा। यह पैसा नियमित मासिक अंतरण के ऊपर दिया गया, त्योहार के…
  • यह वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी अतिरिक्त किस्त है। पहली, इसी राशि की, 1 अगस्त को जारी हुई थी। एक साल में इस आकार की दो अतिरिक्त किस्तों का मतलब है कि राज्यों को अपने हिस्से का बड़ा भाग सामान्य…
  • कर अंतरण केंद्रीय करों का वह हिस्सा है जो सूत्र के अनुसार राज्यों को जाता है। 16वें वित्त आयोग से जुड़े ढांचे के तहत राज्यों को केंद्रीय करों के विभाज्य पूल का 41 प्रतिशत मिलता है। केंद्र वह…

केंद्र ने शनिवार, 31 अक्टूबर को राज्य सरकारों को कर अंतरण की अतिरिक्त किस्त के रूप में 1,09,019 करोड़ रुपये जारी किए, वित्त मंत्रालय ने कहा। यह पैसा नियमित मासिक अंतरण के ऊपर दिया गया, त्योहार के मौसम के कुछ सप्ताह बाद, और राज्यों पर इसे खर्च करने को लेकर कोई शर्त नहीं है।

यह वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी अतिरिक्त किस्त है। पहली, इसी राशि की, 1 अगस्त को जारी हुई थी। एक साल में इस आकार की दो अतिरिक्त किस्तों का मतलब है कि राज्यों को अपने हिस्से का बड़ा भाग सामान्य मासिक कार्यक्रम से पहले मिल गया।

क्या जारी हुआ

कर अंतरण केंद्रीय करों का वह हिस्सा है जो सूत्र के अनुसार राज्यों को जाता है। 16वें वित्त आयोग से जुड़े ढांचे के तहत राज्यों को केंद्रीय करों के विभाज्य पूल का 41 प्रतिशत मिलता है। केंद्र वह हिस्सा साल भर किस्तों में देता है।

अतिरिक्त किस्त से सूत्र नहीं बदलता। समय बदलता है। बाद के महीनों के लिए तय पैसा राज्य के खजाने में पहले पहुंच जाता है, जिससे वित्त विभागों के पास साल के उस समय नकदी रहती है जब खर्च आम तौर पर बढ़ता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने X पर कहा कि इस रिलीज को मजबूत आर्थिक गतिविधि और अच्छी कर वसूली का समर्थन मिला। मंत्रालय ने कहा कि जल्दी रिलीज से राज्यों को पूंजीगत खर्च तेज करने और विकास तथा कल्याण के कामों का भुगतान करने में मदद मिलनी चाहिए।

सबसे बड़े हिस्से

उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ी राशि, 19,208 करोड़ रुपये, मिली। बिहार को 10,845 करोड़ रुपये मिले, इसके बाद मध्य प्रदेश को 8,010 करोड़ और पश्चिम बंगाल को 7,866 करोड़ रुपये मिले। महाराष्ट्र को 7,022 करोड़ और राजस्थान को 6,460 करोड़ रुपये मिले।

दूसरे छोर पर सिक्किम को 365 करोड़ रुपये मिले, सूची में सबसे छोटी राशि। सभी 28 राज्य सूची में थे, और राज्यों के आंकड़े जोड़ने पर कुल 1,09,019 करोड़ रुपये बनता है। वितरण अंतरण सूत्र के अनुसार होता है, जो जनसंख्या, क्षेत्रफल और आय स्तर जैसे कारकों को वजन देता है, इसलिए बड़े और गरीब राज्यों को बड़े हिस्से मिलते हैं।

समय क्यों मायने रखता है

राज्य सरकारें भारत में सार्वजनिक सेवाओं की रोज की लागत का बड़ा हिस्सा उठाती हैं। वे स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी की आपूर्ति और कल्याण योजनाओं का भुगतान करती हैं। जब पैसा पहले आता है, तो विभाग बकाया बिल चुका सकते हैं, जिलों को धन दे सकते हैं और अगले मासिक हस्तांतरण का इंतजार किए बिना परियोजनाएं जारी रख सकते हैं।

पूंजीगत खर्च वह बिंदु है जिस पर मंत्रालय ने जोर दिया। जब राज्य धन का इंतजार करते हैं तो सड़क, सिंचाई और अन्य लंबी अवधि की परियोजनाएं अक्सर धीमी हो जाती हैं। जल्दी किस्त से ठेकेदारों को समय पर भुगतान करने और वह काम शुरू करने में मदद मिलती है जो अगले वित्त वर्ष में जा सकता था।

त्योहार का मौसम उसी समय दबाव बढ़ाता है। मांग बढ़ती है, राज्य कार्यालय छुट्टियों से पहले काम पूरा करना चाहते हैं, और कल्याण भुगतान घरों के लिए अधिक मायने रखता है। राज्य खातों में अतिरिक्त नकदी से साल के इस समय अल्पकालिक उधार की जरूरत कम होती है।

क्या नहीं बदलता

अतिरिक्त किस्त पैसा आगे लाती है। इससे अपने आप पूरे साल में राज्य को मिलने वाली कुल राशि नहीं बढ़ती। साल का कुल अब भी वास्तविक कर वसूली और विभाज्य पूल के 41 प्रतिशत हिस्से पर निर्भर करता है।

यह सीमा घोषणा को समझने के लिए मायने रखती है। राज्यों को अभी खर्च करने की जगह मिलती है, और इससे आने वाले सप्ताहों में परियोजनाओं और भुगतानों में मदद मिल सकती है। राज्य बजट साल के अंत में मजबूत होगा या नहीं, यह बचे हुए महीनों के राजस्व, उधार और खर्च के फैसलों पर निर्भर करेगा, सिर्फ इस रिलीज पर नहीं।

राज्य वित्त विभागों को अब नकदी को जमीन पर काम में बदलना है। अगली कसौटी सरल है: पैसा परियोजना भुगतानों, कल्याण हस्तांतरणों और जिला स्तर के खर्च में कितनी जल्दी दिखता है, और क्या राज्य जल्दी मिली जगह का उपयोग महंगे अल्पकालिक कर्ज को घटाने में करते हैं।

स्रोत

Hindu BusinessLine ने रिलीज और राज्यवार राशियों की रिपोर्ट दी। IANS की रिपोर्ट में मंत्रालय का बयान और वित्त मंत्री की टिप्पणी आई। Devdiscourse ने भी त्योहार के मौसम से पहले रिलीज की रिपोर्ट दी।

टाइमलाइन

  1. Aug 1, 2026केंद्र ने 2026-27 के कर अंतरण की पहली अतिरिक्त किस्त, उसी 1,09,019 करोड़ रुपये की राशि, जारी की।
  2. Oct 31, 2026केंद्र ने त्योहार के मौसम से पहले सभी 28 राज्यों को 1,09,019 करोड़ रुपये की दूसरी अतिरिक्त किस्त जारी की।

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